दुःख अपरिमित
( यह कहानी मूल रूपसे नब्बे के दशक में लिखी गयी थी. पहले ओडिया पत्रिका 'झंकार' में प्रकाशित हुई और बाद में लेखिका का कहानी संग्रह "दुःख अपरिमित" (ISBN : 81-7411-483-1) में संकलित हुई. इस कहानी का सुश्री इप्सिता षडंगी द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद कहानीकार का अंग्रेजी कहानी संग्रह "वेटिंग फॉर मान्ना" ( ISBN : : 8190695606 ISBN-13: 9788190695602) में संकलित हुआ और बाद में सुश्री गोपा नायक द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद वेब मैगजीन MUSE INDIA में भी प्रकाशित हुआ है. यह कहानी का शीर्षक ओडिया के मध्य युगीय संत कवि भीमा भोई की चर्चित कविता से ली गयी है. कविता का हिंदी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत करने में मैं एक अद्भुत गौरव अनुभव कर रहा हूँ : जग में केवल दुःख अपरिमित देख सहन कौन कीजै मेरा जीवन भले नर्क में रहे जगत उद्धार होवे. ) दुःख अपरिमित अगर सोनाली ने उस दिन मेरे हाथ से वह कलम नहीं छीनी होती ,तो वह कभी भी नीचे नहीं गिरी होती . उस कलम को स्कूल साथ ले जाने के लिए मेरी माँ ने मुझे कई बार मना किया था. पर कलम थी ही उतनी सुंदर , आकर्षक व उतनी ही अजीबो-गरीब किस्म की, कि मु...