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चौखट

लेखिका की यह कहानी उनके लेखिका की यह कहानी उनके 'चौकाठ' शीर्षक कहानी संग्रह में संकलित है. नारी मानसिकता के विभिन्न पहलुओं को उजागर करनेवाली इस कहानी में नारी के मन में छिपे हुए संवेदना-बोध का बखूबी चित्रण किया गया है जो पाठक को एक नई अनुभूति से परिचित करवाती है. लेखिका की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति, मानवीय संवेदनाओं की सही पहचान तथा कथा-शैली पर मजबूत पकड़ इस कहानी को एक उत्कृष्ट पर्याय पर ला खड़ी करती है. इस कहानी का अंग्रेजी अनुवाद " थ्रेसहोल्ड" शीर्षक से सुश्री इप्सिता षडंगी ने किया है और लेखिका की अंग्रेजी कहानी संकलन "वेटिंग फॉर मन्ना " में संकलित हुआ है. आशा है, पाठकों को यह कहानी पसंद आएगी. .चौखटवे लोग अभी घर के दरवाजे से बाहर भी नहीं निकले होंगे कि काली बिल्ली ने उनका रास्ता काटा। उन लोगों में सबसे आगे इप्सिता, मध्य में माँ तथा सबसे पीछे पिताजी थे। पिताजी माँ से कहने लगे, “रुक जाओ, काली बिल्ली ने रास्ता काटा है, चलो, वापस भीतर लौट चलें, थोड़ी देर बाद जाएँगे।”यूँ भी इप्सिता बिल्ली द्वारा रास्ते काटे जाने का अंधविश्वास नहीं मानती थी और वह बिल्ली तो घर…