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बेडी

(कहानीकार की यह कहानी उनके ओडिया कहानी संग्रह 'सृजनी : सरोजिनी' (प्रकाशक: अग्रदूत, कटक) में संकलित है. कहानी का अंग्रेजी अनुवाद गोपा नायक द्वारा Shackles शीर्षक से " इंडियन जर्नल ऑफ़ पोस्ट कोलोनिअल लिटरेचर" (ISSN : 0974-7379) के जून २००९ अंक में प्रकाशित हो चुका है. कहानी सही मायने में कहानीकार के नारीवादी दृष्टिकोण को उजागर करती है.) बेडी ऐसा लग रहा था, मानों हम एक खंभे के चारों तरफ चक्कर लगा रहे हो. बहुत ही कष्ट लग रहा था. ऐसा भी प्रतीत होने लगा था, जैसे हमारे पास इसके सिवाय कोई उपाय ही न हो. हम दोनों एक दूसरे से एक क्षण के लिए भी अलग नहीं हो पा रहे थे. मैं उसको समझा-समझा कर थक गयी थी, पर वह थी कि उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. अंत में, तंग आकर, मैंने उस विषय पर अपना सिर नहीं खपाने का निश्चय कर लिया. उसको जो समझ में आये, समझे, जो करना चाहती, करे. मैं यह नहीं कह सकती थी कि यह घटना महज एक सामान्य थी अथवा गंभीर. मेरी दृष्टि में तो वह घटना सामान्य नजर आ रही थी, जबकि उसके हिसाब से तो, वह बहुत ही सीरियस घटना थी. दिक्कत तो इस बात की थी. दुगनी उत्तेजना के साथ वह अपनी बा...

दुःख अपरिमित

( यह कहानी मूल रूपसे नब्बे के दशक में लिखी गयी थी. पहले ओडिया पत्रिका 'झंकार' में प्रकाशित हुई और बाद में लेखिका का कहानी संग्रह "दुःख अपरिमित" (ISBN : 81-7411-483-1) में संकलित हुई. इस कहानी का सुश्री इप्सिता षडंगी द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद कहानीकार का अंग्रेजी कहानी संग्रह "वेटिंग फॉर मान्ना" ( ISBN : : 8190695606 ISBN-13: 9788190695602) में संकलित हुआ और बाद में सुश्री गोपा नायक द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद वेब मैगजीन MUSE INDIA में भी प्रकाशित हुआ है. यह कहानी का शीर्षक ओडिया के मध्य युगीय संत कवि भीमा भोई की चर्चित कविता से ली गयी है. कविता का हिंदी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत करने में मैं एक अद्भुत गौरव अनुभव कर रहा हूँ : जग में केवल दुःख अपरिमित देख सहन कौन कीजै मेरा जीवन भले नर्क में रहे जगत उद्धार होवे. ) दुःख अपरिमित अगर सोनाली ने उस दिन मेरे हाथ से वह कलम नहीं छीनी होती ,तो वह कभी भी नीचे नहीं गिरी होती . उस कलम को स्कूल साथ ले जाने के लिए मेरी माँ ने मुझे कई बार मना किया था. पर कलम थी ही उतनी सुंदर , आकर्षक व उतनी ही अजीबो-गरीब किस्म की, कि मु...